अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगी आग के बीच भारतीय रसोई घरों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भारी तनाव और वैश्विक स्तर पर एलपीजी की बढ़ती कीमतों के बावजूद मोदी सरकार देश के आम नागरिकों को भारी सब्सिडी और वित्तीय सहायता देकर बढ़ती महंगाई की मार से बचा रही है। वैश्विक संकट के इस दौर में जहां दुनिया भर में ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं भारत में घरेलू गैस उपभोक्ताओं को बाजार लागत की तुलना में बेहद सस्ते दामों पर एलपीजी सिलेंडर मुहैया कराया जा रहा है। सरकार इस समय देश के करोड़ों परिवारों के बजट को बिगड़ने से बचाने के लिए खुद बड़ा नुकसान उठा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 46 प्रतिशत का भारी उछाल और भारत पर असर
वैश्विक स्तर पर एलपीजी की कीमतों का निर्धारण करने वाले प्रमुख मानक ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ में पिछले कुछ महीनों के भीतर रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस 542.5 डॉलर प्रति टन के स्तर पर था, जो जून 2026 में महज चार महीनों के भीतर लगभग 46 प्रतिशत बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पर पहुंच चुका है।
इस अंतरराष्ट्रीय तेजी के कारण भारत में 14.2 किलोग्राम वाले एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक सप्लाई लागत (सप्लाई कॉस्ट) अब बढ़कर 1,600 रुपये से भी अधिक हो चुकी है, जो पहले लगभग 1,200 रुपये हुआ करती थी। इस बढ़ती लागत के बावजूद केंद्र सरकार ने इसका सीधा बोझ आम जनता की जेब पर नहीं आने दिया है। सरकार इस समय सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 658 रुपये की अप्रत्यक्ष राहत दे रही है, जिसके कारण दिल्ली में आम उपभोक्ताओं के लिए यह सिलेंडर केवल 942 रुपये में उपलब्ध है।

उज्ज्वला योजना के 10.58 करोड़ परिवारों को 958 रुपये का बंपर फायदा
देश के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को धुएं से मुक्ति दिलाने के लिए शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के लाभार्थियों के लिए यह राहत और भी बड़ी है। इस योजना के तहत आने वाले 10.58 करोड़ से अधिक परिवारों को सरकार की तरफ से सीधी वित्तीय मदद दी जा रही है।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से प्रति सिलेंडर 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिल रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि जहां एक सिलेंडर की वास्तविक सप्लाई लागत 1,600 रुपये से ज्यादा है, वहीं उज्ज्वला लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर सब्सिडी के बाद यह सिलेंडर मात्र 642 रुपये में मिल रहा है। इस तरह इन गरीब परिवारों को प्रति सिलेंडर 958 रुपये की ऐतिहासिक बचत हो रही है। पेट्रोलियम कंपनियों को इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक सिलेंडर पर करीब 703 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसकी भरपाई सरकार कर रही है।
वैश्विक बाजार बनाम भारतीय बाजार: दुनिया के मुकाबले भारत में गैस बेहद सस्ती
यदि भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की तुलना दुनिया के अन्य विकसित और पड़ोसी देशों से की जाए, तो भारतीय उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत साफ नजर आती है। जहां भारत के सामान्य उपभोक्ता को 942 रुपये और उज्ज्वला लाभार्थियों को 642 रुपये में सिलेंडर मिल रहा है, वहीं पड़ोसी देशों और पश्चिमी देशों में इसके दाम काफी ज्यादा हैं।
| देश या शहर | 14.2 किलो एलपीजी सिलेंडर की अनुमानित कीमत (रुपये में) |
| भारत (उज्ज्वला लाभार्थी) | ₹642 |
| भारत (नई दिल्ली बेंचमार्क) | ₹942 |
| पाकिस्तान | ₹1,046 |
| नेपाल | ₹1,207 |
| बांग्लादेश | ₹1,225 |
| श्रीलंका | ₹1,241 |
| अमेरिका | ₹1,755 |
| ऑस्ट्रेलिया | ₹1,765 |
| कनाडा | ₹2,411 |
इस डेटा से स्पष्ट है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में घरेलू रसोई गैस की कीमतें दुनिया के कई बड़े संपन्न देशों और हमारे पड़ोसियों की तुलना में काफी नियंत्रित स्थिति में हैं।
घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में अंतर का मुख्य कारण
कई उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठता है कि होटल, रेस्तरां और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर के दाम हर महीने बदलते हैं, लेकिन घरेलू सिलेंडर के दामों में उस अनुपात में बदलाव क्यों नहीं होता। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कमर्शियल गैस की कीमतों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव से जोड़ा गया है।
इसके विपरीत, घरेलू रसोई गैस सीधे आम नागरिक के मासिक बजट और जीवनयापन की लागत को प्रभावित करती है। इसी वजह से सरकार घरेलू एलपीजी की कीमतों को अपने नियंत्रण में रखती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने पर भी खुद नुकसान सहकर घरेलू उपभोक्ताओं पर महंगाई का सीधा हमला होने से रोकती है। हाल ही में रविवार 7 जून से घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की मामूली बढ़ोतरी की गई है, जिससे दिल्ली में इसकी कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हुई है, जबकि इससे पहले मार्च में 60 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई थी।
होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच भारत में एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज स्ट्रेट (समुद्री व्यापार मार्ग) में आने वाली तमाम रुकावटों के बाद भी भारत के भीतर एलपीजी की सप्लाई चेन पर कोई आंच नहीं आई है। केंद्र सरकार ने देश में ईंधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घरेलू स्तर पर एलपीजी के उत्पादन को तेजी से बढ़ाया है।
सरकारी रणनीतियों के तहत देश के भीतर घरेलू एलपीजी उत्पादन को 32 हजार मीट्रिक टन से बढ़ाकर सीधे 52 हजार मीट्रिक टन के स्तर पर पहुंचा दिया गया है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं के बाद भी भारत के किसी भी राज्य या हिस्से में रसोई गैस की कोई किल्लत या कमी नहीं है और देश भर में आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है।
निष्कर्ष
वैश्विक बाजार में एलपीजी की कीमतों में 46% का उछाल और घरेलू सप्लाई लागत का 1,600 रुपये के पार जाना एक बड़ा आर्थिक संकट बन सकता था। लेकिन सरकार द्वारा दी जा रही भारी वित्तीय सहायता और पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा उठाए जा रहे नुकसान के कारण भारत के 10.58 करोड़ उज्ज्वला परिवारों को 958 रुपये और आम उपभोक्ताओं को 658 रुपये की सीधी बचत मिल रही है। सरकार की इस नीति ने अंतरराष्ट्रीय महंगाई के दौर में भी भारतीय रसोई के बजट को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।
People Also Ask (FAQs)
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को वर्तमान में एलपीजी सिलेंडर पर कितनी सब्सिडी मिल रही है?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले देश के 10.58 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को वर्तमान में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सीधी सब्सिडी दी जा रही है। इस विशेष सब्सिडी के कारण इन परिवारों को घरेलू गैस सिलेंडर बाजार दर से बहुत कम कीमत पर मिलता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें बढ़ने के बाद भी भारत में घरेलू सिलेंडर इतना सस्ता क्यों है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस बढ़ने के कारण सिलेंडर की वास्तविक सप्लाई लागत 1,600 रुपये से अधिक हो गई है। इसके बावजूद भारत सरकार आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए भारी वित्तीय सहायता दे रही है। सरकार और तेल कंपनियों द्वारा नुकसान उठाने के कारण ही उपभोक्ताओं को यह काफी कम कीमत पर मिल रहा है।
क्या भारत में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें हर महीने बदलती हैं?
नहीं, भारत में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें हर महीने नहीं बदलती हैं क्योंकि सरकार आम उपभोक्ताओं के बजट को स्थिर रखना चाहती है। हालांकि, होटल और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करती हैं और उनमें हर महीने की पहली तारीख को बदलाव होता है।
होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया के संकट का भारत में एलपीजी की सप्लाई पर क्या असर पड़ा है?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री मार्गों में व्यवधान के बावजूद भारत में एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। भारत सरकार ने समय रहते रणनीतिक कदम उठाते हुए देश के भीतर घरेलू एलपीजी उत्पादन को 32 हजार मीट्रिक टन से बढ़ाकर 52 हजार मीट्रिक टन कर दिया है, जिससे देश में गैस की कोई कमी नहीं है।
सामान्य उपभोक्ताओं को वास्तविक सप्लाई लागत की तुलना में कितने रुपये की राहत मिल रही है?
14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक सप्लाई लागत इस समय 1,600 रुपये से ज्यादा है, जबकि दिल्ली में सामान्य उपभोक्ता इसे 942 रुपये में खरीद रहे हैं। इस प्रकार, सरकार सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर लगभग 658 रुपये की अप्रत्यक्ष वित्तीय राहत प्रदान कर रही है।
Interactive Knowledge Check (MCQ Quiz)
Q1. जून 2026 तक पिछले चार महीनों में अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों (सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस) में कितने प्रतिशत का उछाल आया है?
A) 20 प्रतिशत
B) 35 प्रतिशत
C) 46 प्रतिशत
D) 60 प्रतिशत
Correct Answer: C
Q2. वर्तमान में भारत के भीतर 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक सप्लाई लागत कितनी हो गई है?
A) 1,200 रुपये से कम
B) 1,400 रुपये
C) 1,600 रुपये से अधिक
D) 2,000 रुपये
Correct Answer: C
Q3. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर कितने रुपये की डायरेक्ट सब्सिडी (DBT) मिल रही है?
A) 100 रुपये
B) 200 रुपये
C) 300 रुपये
D) 500 रुपये
Correct Answer: C
Q4. सब्सिडी और सरकारी राहत के बाद दिल्ली में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को घरेलू सिलेंडर कितने रुपये में मिल रहा है?
A) 942 रुपये
B) 642 रुपये
C) 750 रुपये
D) 800 रुपये
Correct Answer: B
Q5. देश में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए घरेलू एलपीजी उत्पादन को 32 हजार मीट्रिक टन से बढ़ाकर कितने मीट्रिक टन किया गया है?
A) 40 हजार मीट्रिक टन
B) 45 हजार मीट्रिक टन
C) 52 हजार मीट्रिक टन
D) 65 हजार मीट्रिक टन
Correct Answer: C

