अंतरराष्ट्रीय बाजार से एक बहुत बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। लंबे समय के तनाव के बाद आखिरकार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक बड़े समझौते के बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों की आवाजाही के लिए दोबारा खोल दिया गया है। इस भू-राजनीतिक सुधार का सीधा असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ा और इस साल 1 मार्च के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 80 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे फिसल गया। इस ऐतिहासिक गिरावट के बावजूद घरेलू स्तर पर आम जनता को सीधे तौर पर कोई नई राहत मिलती नहीं दिख रही है। भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने आज यानी बुधवार, 17 जून 2026 को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। देश में पिछले महीने 25 मई के बाद से ईंधन की कीमतें पूरी तरह स्थिर बनी हुई हैं। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी बड़ी गिरावट के बाद भी भारत में कीमतें क्यों नहीं घट रही हैं और आज आपके शहर में तेल का ताजा भाव क्या है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल: $80 के नीचे आया ब्रेंट क्रूड
वैश्विक तेल बाजार के लिए होर्मुज स्ट्रेट का खुलना एक गेम-चेंजर साबित हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच सुलह के बाद इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही सामान्य हो गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में आने वाली बाधाएं दूर हो गई हैं। इसी का परिणाम है कि कच्चे तेल की कीमतों में भारी नरमी देखी गई।
हालांकि, इस गिरावट के बाद आज सुबह के शुरुआती कारोबार में मामूली रिकवरी भी दर्ज की गई। बुधवार सुबह करीब छह बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्टेंडर्ड ब्रेंट क्रूड का भाव 0.72 प्रतिशत या 0.57 डॉलर की तेजी के साथ 79.53 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता देखा गया। इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) भी 0.75 प्रतिशत यानी 0.57 डॉलर की बढ़त के साथ 76.62 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही बाजार में आज मामूली सुधार दिख रहा हो, लेकिन 80 डॉलर के नीचे क्रूड का आना भारतीय अर्थव्यवस्था और तेल कंपनियों के लिए बड़ी राहत की बात है।

पिछले महीने 4 बार बढ़ी थीं कीमतें: मई का वो झटका
भले ही पिछले कुछ हफ्तों से देश में तेल के दाम शांत हैं, लेकिन आम जनता पिछले महीने लगे झटकों को भूली नहीं है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सरकारी तेल कंपनियों ने मई के महीने में महज 11 दिनों के भीतर चार बार ईंधन के दामों में भारी बढ़ोतरी की थी।
दामों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला 15 मई 2026 को शुरू हुआ था, जब पहली बार में ही पेट्रोल 3 रुपये और डीजल 3.29 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया गया था। इसके ठीक बाद 19 मई को पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे की बढ़ोतरी हुई। तेल कंपनियों ने यहीं राहत नहीं दी और 23 मई 2026 को एक बार फिर पेट्रोल पर 87 पैसे और डीजल पर 91 पैसे बढ़ा दिए गए। मई महीने का आखिरी और सबसे बड़ा झटका 25 मई 2026 को लगा, जब पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया गया। 25 मई की इस अंतिम बढ़ोतरी के बाद से आज 17 जून तक देश में कीमतें जस की तस बनी हुई हैं।
घरेलू तेल कंपनियों को भारी घाटा: क्यों नहीं घट रहे दाम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरने के बाद भी भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता न होने के पीछे सरकारी तेल कंपनियों का पुराना घाटा है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को मौजूदा कीमतों पर भी प्रति लीटर तेल बेचने पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, आज की तारीख में भी सरकारी तेल कंपनियों को हर एक लीटर पेट्रोल बेचने पर 3 रुपये का नुकसान हो रहा है, जबकि डीजल की बिक्री पर यह घाटा बढ़कर 27 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाता है। हालांकि, यह स्थिति पहले के मुकाबले काफी बेहतर है। उदाहरण के लिए, 1 अप्रैल 2026 को कंपनियों को पेट्रोल पर 24 रुपये और डीजल पर रिकॉर्ड 105 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा था, जो कि ईरान संकट और युद्ध की वजह से कच्चे तेल में आई 50 प्रतिशत तक की तेजी का नतीजा था। लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचने के कारण इस समय भी सरकारी तेल कंपनियों को हर रोज करीब 600 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है, जो बीते 18 मई को प्रतिदिन 750 करोड़ रुपये के स्तर पर था। यही कारण है कि कंपनियां वैश्विक गिरावट का फायदा तुरंत उपभोक्ताओं को देने की स्थिति में नहीं हैं।
आपके शहर में पेट्रोल-डीजल का ताजा रेट: 17 जून 2026
देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में स्थानीय टैक्स और वैट (VAT) की दरों में अंतर होने के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें भिन्न होती हैं। आज देश के प्रमुख चार महानगरों समेत विभिन्न बड़े शहरों में ईंधन के दाम इस प्रकार हैं:
| शहर | पेट्रोल का भाव (रुपये/लीटर) | डीजल का भाव (रुपये/लीटर) |
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| चेन्नई | 107.77 | 99.55 |
| भोपाल | 114.57 | 99.64 |
| पटना | 113.37 | 99.36 |
| रांची | 105.26 | 100.49 |
| नोएडा | 102.12 | 97.56 |
| लखनऊ | 101.89 | 95.36 |
| चंडीगढ़ | 101.51 | 89.47 |
अपने शहर का रोज का भाव ऐसे चेक करें
देश में पेट्रोल और डीजल के बदले हुए दाम हर रोज सुबह 6 बजे अपडेट कर दिए जाते हैं। अगर आप घर बैठे अपने शहर के पेट्रोल और डीजल के दाम जानना चाहते हैं, तो आप केवल एक एसएमएस (SMS) के जरिए आसानी से यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- इंडियन ऑयल (IOCL): अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में जाकर RSP [स्पेस] अपने शहर का कोड लिखें और उसे 9224992249 पर भेज दें।
- भारत पेट्रोलियम (BPCL): अपने फोन से RSP [स्पेस] शहर का कोड लिखकर 9223112222 नंबर पर एसएमएस करें।
- हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL): दाम जानने के लिए HPPRICE [स्पेस] अपने शहर का कोड लिखकर 9222201122 नंबर पर सेंड करें।
निष्कर्ष
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी सहमति ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को बड़ी राहत दी है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतें $80 के नीचे आ गई हैं। भारतीय उपभोक्ताओं के लिए भले ही आज कीमतों में कोई सीधी कटौती नहीं की गई है, लेकिन क्रूड का यह निचला स्तर घरेलू तेल विपणन कंपनियों के दैनिक घाटे को कम करने में मदद करेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह स्थिर या कम बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सरकारी तेल कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म होने के बाद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी कटौती की उम्मीद की जा सकती है।
People Also Ask (FAQs)
आज भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्यों नहीं बदलीं?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आने के बावजूद भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को अभी भी पुराना घाटा पूरा करना पड़ रहा है। वर्तमान में कंपनियों को पेट्रोल पर 3 रुपये और डीजल पर 27 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसी घाटे की भरपाई के कारण आज देश में कीमतें स्थिर रखी गई हैं।
होर्मुज स्ट्रेट विवाद क्या है और इसका तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह मार्ग बाधित चल रहा था, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। अब दोनों देशों में सुलह के बाद इसे दोबारा खोल दिया गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति सुचारू हुई और क्रूड के दाम गिर गए।
देश में पेट्रोल और डीजल के दाम रोज किस समय तय किए जाते हैं?
भारत में सरकारी तेल कंपनियां वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के आधार पर हर रोज सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए दामों की घोषणा करती हैं। टैक्स और डीलर कमीशन जुड़ने के बाद हर शहर में अंतिम खुदरा कीमत लागू होती है।
क्या आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता हो सकता है?
हां, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लंबे समय तक 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बनी रहती हैं, तो भारतीय तेल कंपनियों का दैनिक घाटा (जो अभी 600 करोड़ रुपये है) समाप्त हो जाएगा। कंपनियों के मुनाफे में आते ही सरकार आम जनता को राहत देने के लिए कीमतों में कटौती कर सकती है।
अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल का रेट अलग क्यों होता है?
केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में ईंधन पर समान उत्पाद शुल्क (Excise Duty) लगाया जाता है, लेकिन इसके बाद हर राज्य सरकार अपनी सुविधानुसार अलग-अलग दर से वैट (VAT) और स्थानीय विकास उपकर लगाती हैं। राज्यों के टैक्स ढांचे और परिवहन लागत में अंतर के कारण ही विभिन्न शहरों में कीमतें अलग होती हैं।
Interactive Knowledge Check (MCQ Quiz)
1 मार्च के बाद पहली बार कच्चे तेल का दाम किस मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे आया है?
A) 90 डॉलर प्रति बैरल
B) 85 डॉलर प्रति बैरल
C) 80 डॉलर प्रति बैरल
D) 75 डॉलर प्रति बैरल
Correct Answer: C
अमेरिका और किस देश के बीच समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला गया है?
A) रूस
B) ईरान
C) सऊदी अरब
D) इराक
Correct Answer: B
वर्तमान में सरकारी तेल कंपनियों को प्रति लीटर डीजल की बिक्री पर कितने रुपये का नुकसान हो रहा है?
A) 3 रुपये
B) 15 रुपये
C) 24 रुपये
D) 27 रुपये
Correct Answer: D
भारत में पेट्रोल और डीजल की संशोधित कीमतें हर रोज सुबह कितने बजे जारी की जाती हैं?
A) सुबह 5 बजे
B) सुबह 6 बजे
C) सुबह 8 बजे
D) रात 12 बजे
Correct Answer: B
तेल कंपनियों द्वारा लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचने के कारण वर्तमान में रोजाना कितने करोड़ का घाटा हो रहा है?
A) 500 करोड़ रुपये
B) 600 करोड़ रुपये
C) 750 करोड़ रुपये
D) 1000 करोड़ रुपये
Correct Answer: B

