घर में रखे फेवीक्विक या सुपर ग्लू से अनजाने में बच्चों के साथ बड़े हादसे हो जाते हैं. अगर अचानक खेलते-खेलते बच्चे की आंख में फेवीक्विक की बूंदें चली जाएं, तो माता-पिता का घबरा जाना स्वाभाविक है. ऐसी स्थिति में समझदारी और सही जानकारी ही बच्चे की आंखों की रोशनी को सुरक्षित रख सकती है. जल्दबाजी में उठाया गया एक भी गलत कदम मासूम की नाजुक आंख को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकता है. इस लेख में हम आई एक्सपर्ट डॉक्टर दीपिका गर्ग द्वारा बताए गए उन जरूरी उपायों और बड़ी गलतियों के बारे में जानेंगे, जो ऐसी इमरजेंसी में हर माता-पिता को तुरंत पता होनी चाहिए.
फेवीक्विक आंख में जाने पर तुरंत क्या होता है?
फेवीक्विक एक बेहद शक्तिशाली और तेजी से चिपकने वाला एडहेसिव है. डॉक्टर दीपिका गर्ग के अनुसार, फेवीक्विक में सायनोएक्रिलाइट (Cyanoacrylate) नाम का एक खतरनाक केमिकल होता है. यह केमिकल हवा और नमी के संपर्क में आते ही चंद सेकेंडों में सख्त हो जाता है. जब यह बच्चे की आंख में जाता है, तो पलकें (Eyeids) और बरौनियां (Eyelashes) आपस में बुरी तरह चिपक जाती हैं. इसके कारण आंख में तेज जलन, लालपन, लगातार पानी आना और कॉर्निया (आंख की पुतली की बाहरी परत) पर खरोंच आने का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है. चिकित्सा विज्ञान में इसे एक गंभीर ‘मेडिकल इमरजेंसी’ माना जाता है.

भूलकर भी न करें ये 3 बड़ी गलतियां
ऐसी आपातकालीन स्थिति में अधिकांश लोग घबराहट में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो समस्या को और ज्यादा बढ़ा देती हैं. डॉक्टर ने विशेष रूप से इन तीन बातों से बचने की सलाह दी है:
- चिपकी पलकों को जबरन न खींचें: अगर बच्चे की पलकें आपस में चिपक गई हैं, तो उन्हें हाथ से खींचकर अलग करने की कोशिश बिल्कुल न करें. ऐसा करने से आंख की नाजुक त्वचा छिल सकती है, बरौनियां टूट सकती हैं या आंख के अंदरूनी हिस्से में गहरी चोट आ सकती है.
- आंखों को बिल्कुल न रगड़ें: बच्चा दर्द के मारे आंख को रगड़ने का प्रयास करेगा, लेकिन उसे ऐसा करने से रोकें. फेवीक्विक सूखने के बाद सख्त हो जाता है. आंख रगड़ने से वह सूखा हुआ ग्लू कॉर्निया को बुरी तरह खरोंच (Corneal Abrasion) सकता है, जिससे अंधापन भी हो सकता है.
- घरेलू केमिकल का इस्तेमाल न करें: कुछ लोग ग्लू छुड़ाने के लिए नेल पॉलिश रिमूवर (एसीटोन), पेंट थिनर या किसी अन्य लिक्विड का इस्तेमाल करने की भूल करते हैं. ये केमिकल आंख के अंदरूनी टिश्यूज को हमेशा के लिए जला सकते हैं.
तुरंत उठाएं ये कदम (First Aid Guide)
जैसे ही आपको पता चले कि बच्चे की आंख में सुपर ग्लू गया है, बिना एक पल गंवाए आपको निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
- रनिंग वॉटर से धोएं: सबसे पहले बच्चे को वॉशबेसिन या नल के पास ले जाएं. प्रभावित आंख पर लगातार 20 मिनट तक साफ और हल्के ठंडे पानी की धार (Running Water) डालें. पानी के निरंतर बहाव से केमिकल का असर कम होता है और ग्लू के छोटे-छोटे कण टूटकर बाहर निकल जाते हैं.
- आंख को शांत रखने की कोशिश करें: पानी से धोने के बाद बच्चे को शांत करें और उसे आंख बंद रखने को कहें ताकि घर्षण न हो.
- तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें: प्राथमिक उपचार के बाद बिना कोई समय गंवाए बच्चे को किसी नजदीकी आई स्पेशलिस्ट (आंखों के डॉक्टर) या अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ले जाएं.
डॉक्टर अस्पताल में कैसे करते हैं इलाज?
अस्पताल पहुंचने के बाद विशेषज्ञ डॉक्टर बेहद सुरक्षित तरीके से इस समस्या का समाधान करते हैं. डॉक्टरों की प्रक्रिया को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:
| उपचार के चरण | डॉक्टर द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया | इसका मुख्य उद्देश्य |
| पहला चरण | सलाइन वॉटर (Saline Water) से आंख की गहन सफाई | आंख से बचे हुए केमिकल और ढीले ग्लू को बाहर निकालना |
| दूसरा चरण | विशेष लुब्रिकेटिंग ऑइंटमेंट या ड्रॉप्स का उपयोग | जमे हुए सख्त ग्लू को धीरे-धीरे नरम (Soften) करना |
| तीसरा चरण | माइक्रोस्कोपिक उपकरणों द्वारा ग्लू हटाना | बिना किसी चोट के पलकों और कॉर्निया से ग्लू को अलग करना |
निष्कर्ष
बच्चों के आसपास फेवीक्विक या कोई भी केमिकल रखते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए. यदि कभी ऐसा हादसा हो भी जाए, तो घबराहट को खुद पर हावी न होने दें. डॉक्टर दीपिका गर्ग की सलाह के अनुसार, 20 मिनट तक आंख को साफ पानी से धोना और तुरंत डॉक्टर के पास जाना ही सबसे सुरक्षित और सही तरीका है. आपकी सजगता और त्वरित निर्णय ही बच्चे की अनमोल आंखों की रक्षा कर सकता है.
