किसानों की चमकी किस्मत: कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का लोन लक्ष्य बढ़कर हुआ ₹2 लाख करोड़, जानें कैसे मिलेगा 3% ब्याज छूट का बंपर लाभ
क्या आप भी खेती-किसानी करते हैं और फसल कटने के बाद उसके सही भंडारण या उचित दाम न मिलने की भारी समस्या से परेशान रहते हैं? भारत में हर साल लाखों टन अनाज, फल और सब्जियां केवल इसलिए खराब हो जाती हैं क्योंकि ग्रामीण स्तर पर हमारे पास कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और ग्रेडिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। किसानों की इस सबसे बड़ी और पुरानी समस्या का स्थायी समाधान निकालने और उनकी आय को सुरक्षित करने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने एक बेहद ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) यानी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत लोन देने के लक्ष्य को दोगुना कर दिया गया है। इस विस्तृत और विश्लेषणात्मक लेख में हम गहराई से समझेंगे कि कैसे यह ₹2 लाख करोड़ का नया फंड आपके गांव, आपकी खेती के तरीके और आपके मुनाफे की पूरी तस्वीर को जड़ से बदल कर रख देगा।
कृषि अवसंरचना कोष (AIF) में बड़ा बदलाव: ₹1 लाख करोड़ से ₹2 लाख करोड़ का सफर
भारतीय कृषि व्यवस्था हमेशा से उत्पादन के मोर्चे पर मजबूत रही है, लेकिन कटाई के बाद के प्रबंधन (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट) में हम काफी पीछे रहे हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए भारत सरकार ने कृषि अवसंरचना कोष की शुरुआत की थी। शुरुआत में इस योजना के तहत देश भर में कृषि ढांचे को मजबूत करने के लिए ₹1 लाख करोड़ के ऋण का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन योजना की अपार सफलता और ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही भारी मांग को देखते हुए, केंद्र सरकार ने अब इस ऋण लक्ष्य को बढ़ाकर ₹2 लाख करोड़ कर दिया है।
यह भारी-भरकम बढ़ोतरी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यह योजना कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत कृषि, सहयोग और किसान कल्याण विभाग द्वारा संचालित की जा रही है। इसका मुख्य फोकस गांव के स्तर पर ही ऐसा बुनियादी ढांचा खड़ा करना है, जिससे किसान अपनी फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकें और बाजार में दाम बढ़ने पर ही उसे बेचें, न कि मजबूरी में औने-पौने दामों पर।

योजना को कौन चला रहा है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
कृषि अवसंरचना कोष एक मध्यम और दीर्घकालिक ऋण वित्तपोषण सुविधा है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य कटाई के बाद प्रबंधन बुनियादी ढांचे और सामुदायिक कृषि संपत्तियों के निर्माण के लिए निवेश को बढ़ावा देना है। जब गांवों में ही प्रसंस्करण इकाइयां (प्रोसेसिंग यूनिट्स) लगेंगी, तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अनगिनत अवसर पैदा होंगे और किसानों को उनकी उपज का वास्तविक मूल्य मिल सकेगा।
किन्हें मिलेगा इस महा-योजना का सीधा लाभ? (पात्र लाभार्थी)
इस योजना को बेहद पारदर्शी और व्यापक बनाया गया है ताकि इसका लाभ समाज के हर उस वर्ग को मिले जो कृषि से जुड़ा है। योजना के पात्र लाभार्थियों की सूची में कई अहम नाम शामिल हैं।
इसमें राज्य की एजेंसियां, कृषि उपज मंडी समितियां (APMC), सहकारी समितियों के राष्ट्रीय एवं राज्य संघ, प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS) और विपणन सहकारी समितियां शामिल हैं। इसके अलावा किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG), संयुक्त देयता समूह (JLG), बहुउद्देशीय सहकारी समितियां, व्यक्तिगत किसान, उभरते हुए कृषि उद्यमी, एग्री-स्टार्टअप और केंद्र या राज्य एजेंसी द्वारा प्रायोजित सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) परियोजनाएं भी इसका लाभ उठा सकती हैं।
25 नई परियोजनाओं की छूट का क्या मतलब है?
नए दिशा-निर्देशों के तहत एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव यह किया गया है कि अब कोई भी एकल इकाई (सिंगल एंटिटी) अलग-अलग स्थानों पर अधिकतम 25 परियोजनाएं स्थापित कर सकती है। पहले इसकी सीमा सीमित थी। इस नए नियम से जो उद्यमी या संस्थाएं बड़े पैमाने पर कृषि ढांचे में निवेश करना चाहती हैं, उनके लिए रास्ते पूरी तरह से खुल गए हैं। इससे निजी निवेश में भारी उछाल आने की संभावना है।
किन कृषि कार्यों और परियोजनाओं के लिए मिलेगा सस्ता लोन?
कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का पैसा आप किसी भी मनमाने काम के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते। सरकार ने उन परियोजनाओं की एक विस्तृत सूची तैयार की है जो सीधे तौर पर फसल को खराब होने से बचाती हैं और उसकी गुणवत्ता बढ़ाती हैं।
योजना के अंतर्गत जिन प्रमुख परियोजनाओं को लोन और सब्सिडी का लाभ मिलेगा उनमें शामिल हैं:
- एकीकृत प्राथमिक और द्वितीयक प्रसंस्करण इकाइयां (प्राइमरी एंड सेकेंडरी प्रोसेसिंग यूनिट्स)
- आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और चिलिंग प्लांट
- बड़े वेयरहाउस और गोदाम
- अनाज भंडारण के लिए साइलो (Silos)
- असेयिंग और ग्रेडिंग यूनिट (फसल की गुणवत्ता जांचने और छांटने की मशीनें)
- आधुनिक पैकिंग यूनिट
- फलों को पकाने वाले कक्ष (राइपनिंग चैंबर)
- सब्जियों और फलों को सुरक्षित रखने वाले वैक्सिंग प्लांट
फसल की बर्बादी रुकेगी और किसानों की आय दोगुनी होगी
भारत में तापमान और मौसम की अनिश्चितता के कारण जल्दी खराब होने वाली फसलों (जैसे टमाटर, प्याज, आलू, फल) का भारी नुकसान होता है। कोल्ड स्टोरेज और राइपनिंग चैंबर जैसी सुविधाओं के गांव के करीब विकसित होने से किसान अपनी उपज को तुरंत सुरक्षित कर सकेंगे। जब बाजार में अधिक आपूर्ति के कारण दाम गिर जाते हैं, तब किसान अपनी फसल को इन गोदामों में रखकर इंतजार कर सकते हैं और सही समय आने पर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
लोन की सीमा, मार्जिन और ब्याज में भारी छूट (Interest Subvention)
किसानों और छोटे उद्यमियों के मन में सबसे बड़ा डर लोन के भारी भरकम ब्याज का होता है। सरकार ने इस डर को खत्म करने के लिए बहुत ही शानदार वित्तीय ढांचा तैयार किया है।
योजना के तहत अगर आप 2 करोड़ रुपये तक का लोन लेते हैं, तो आपको अपनी तरफ से (मार्जिन मनी के रूप में) परियोजना लागत का न्यूनतम 10 प्रतिशत हिस्सा लगाना होगा। वहीं, अगर आपकी परियोजना बड़ी है और आप 2 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण चाहते हैं, तो यह मार्जिन मनी 25 प्रतिशत हो जाएगी।
ब्याज दर की बात करें तो 2 करोड़ रुपये तक के लोन पर ब्याज दर 6 महीने के एमसीएलआर (MCLR) प्लस 100 बेसिस पॉइंट्स के आधार पर तय होगी। सबसे बड़ी राहत यह है कि 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर सरकार की तरफ से 3 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज अनुदान (इंटरेस्ट सबवेंशन) दिया जाएगा। यह छूट अधिकतम सात वर्षों तक मिलेगी।
ऋण चुकाने की अवधि और मोराटोरियम की सुविधा
कृषि परियोजनाओं को स्थापित करने और उनसे मुनाफा कमाने में समय लगता है। इसे समझते हुए सरकार ने लोन चुकाने की अधिकतम अवधि को 10 वर्ष तक रखा है। इसमें अधिस्थगन अवधि (मोराटोरियम) भी शामिल है। मोराटोरियम का मतलब है कि लोन मिलने के तुरंत बाद आपको ईएमआई नहीं चुकानी होती। यह छूट परियोजना की प्रकृति के आधार पर न्यूनतम 6 महीने से लेकर अधिकतम 2 वर्ष तक की हो सकती है।
बिना गारंटी का लोन: क्रेडिट गारंटी की सुविधा
लोन लेते समय बैंक अक्सर गारंटी (कोलैटरल) मांगते हैं जो छोटे किसानों और उद्यमियों के पास नहीं होती। इस योजना में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) के रूप में पंजीकृत उधारकर्ताओं को 2 करोड़ रुपये तक के लोन पर सीजीटीएमएसई (CGTMSE) के तहत क्रेडिट गारंटी कवर प्रदान किया जाता है। वहीं, अगर कोई किसान उत्पादक संगठन (FPO) लोन लेता है, तो उसे नाबार्ड (NABARD) के तहत एनएबी संरक्षण (NABSanrakshan) के माध्यम से क्रेडिट गारंटी दी जाती है। इसका सीधा अर्थ है कि आपको अपनी जमीन या घर गिरवी रखने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
तुलनात्मक डेटा विश्लेषण: एआईएफ योजना के पुराने और नए नियमों में अंतर
नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आप आसानी से समझ सकते हैं कि सरकार ने इस योजना में क्या बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं:
| विवरण (योजना के मुख्य बिंदु) | पुरानी स्थिति / नियम | नई स्थिति / ताज़ा अपडेट |
| कुल एआईएफ लोन लक्ष्य | ₹1 लाख करोड़ | ₹2 लाख करोड़ (दोगुना किया गया) |
| एकल इकाई के लिए अधिकतम प्रोजेक्ट | सीमित (आमतौर पर 1) | अधिकतम 25 प्रोजेक्ट (अलग-अलग स्थानों पर) |
| ब्याज अनुदान (Interest Subvention) | 3% प्रति वर्ष | 3% प्रति वर्ष (₹2 करोड़ तक के लोन पर, 7 वर्षों के लिए) |
| लोन चुकाने की अधिकतम समयावधि | 7 से 10 वर्ष | 10 वर्ष (मोराटोरियम अवधि को मिलाकर) |
| मार्जिन मनी (₹2 करोड़ तक के लोन पर) | 10% अनिवार्य | 10% अनिवार्य |
| मार्जिन मनी (₹2 करोड़ से अधिक पर) | बैंक के नियमानुसार | 25% अनिवार्य मार्जिन |
| ऋण गारंटी कवर (Credit Guarantee) | उपलब्ध | CGTMSE (MSME के लिए) और NABSanrakshan (FPO के लिए) |
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र पर इस ऐतिहासिक फैसले का प्रभाव
कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का लक्ष्य ₹2 लाख करोड़ करना केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी बूटी है। जब गांवों में वेयरहाउस और प्रोसेसिंग यूनिट्स लगेंगी, तो वहां निर्माण कार्य से लेकर संचालन तक में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। शहरों की तरफ होने वाला पलायन रुकेगा।
इसके अलावा, जब किसान अपनी फसल को सीधे बाजार में कच्चे माल के रूप में बेचने के बजाय उसे प्रोसेस करके (जैसे टमाटर से केचप, आलू से चिप्स) बेचेंगे, तो उनकी आय में कई गुना का इजाफा होगा। यह पहल भारतीय कृषि को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और भारत को दुनिया की ‘फूड बास्केट’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम है।
निष्कर्ष
कृषि अवसंरचना कोष (AIF) की सीमा को ₹1 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹2 लाख करोड़ करने का केंद्र सरकार का यह फैसला भारत के कृषि इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस योजना के माध्यम से न केवल कृषि उपज की बर्बादी पर लगाम लगेगी, बल्कि 3% ब्याज छूट, आसान मोराटोरियम और बिना गारंटी वाले ऋण की मदद से छोटे से छोटा किसान भी उद्यमी बन सकेगा। अगर आप भी खेती बाड़ी से जुड़े हैं या ग्रामीण क्षेत्र में कोई नया व्यवसाय शुरू करने की सोच रहे हैं, तो यह आपके लिए सबसे सुनहरा अवसर है। आज ही अपने नजदीकी बैंक शाखा या कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें और इस योजना का लाभ उठाकर अपने भविष्य को सुरक्षित बनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund – AIF) असल में क्या है?
कृषि अवसंरचना कोष भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक वित्तपोषण सुविधा है। इसका मुख्य उद्देश्य फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे, जैसे कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, और प्रोसेसिंग यूनिट्स के निर्माण के लिए किसानों, एफपीओ और कृषि उद्यमियों को आसान और सस्ते ब्याज दर पर बैंक लोन उपलब्ध कराना है।
Q2. इस योजना के तहत लोन पर कितनी सब्सिडी या ब्याज छूट का प्रावधान है?
इस योजना के अंतर्गत ₹2 करोड़ तक के बैंक लोन पर भारत सरकार की ओर से 3 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज अनुदान (इंटरेस्ट सबवेंशन) दिया जाता है। यह विशेष छूट लाभार्थियों को अधिकतम सात वर्षों की अवधि तक मिलती है, जिससे ईएमआई का बोझ काफी कम हो जाता है।
Q3. क्या एक अकेला किसान भी कोल्ड स्टोरेज या वेयरहाउस बनाने के लिए लोन ले सकता है?
हां, बिल्कुल। इस योजना के तहत न केवल सहकारी समितियां और कंपनियां, बल्कि व्यक्तिगत किसान भी आवेदन कर सकते हैं। कोई भी किसान अपनी कृषि भूमि के पास कोल्ड स्टोरेज, अनाज गोदाम या ग्रेडिंग मशीन लगाने के लिए ₹2 करोड़ तक का ऋण 3% ब्याज छूट के साथ प्राप्त कर सकता है।
Q4. कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत मार्जिन मनी कितनी जमा करनी होती है?
मार्जिन मनी का अर्थ है वह पैसा जो लाभार्थी को अपनी जेब से लगाना होता है। यदि आप ₹2 करोड़ तक का ऋण ले रहे हैं, तो आपको कुल परियोजना लागत का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा खुद लगाना होगा। वहीं, यदि लोन की राशि ₹2 करोड़ से अधिक है, तो 25 प्रतिशत मार्जिन मनी अनिवार्य है।
Q5. एआईएफ योजना के तहत लोन चुकाने के लिए अधिकतम कितना समय मिलता है?
इस योजना के तहत ऋण चुकाने के लिए लाभार्थियों को काफी लंबा समय दिया जाता है। आप अधिकतम 10 वर्षों के भीतर अपना बैंक लोन चुका सकते हैं। इसमें 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक की अधिस्थगन (मोराटोरियम) अवधि भी शामिल है, जिसमें आपको कोई किस्त नहीं देनी होती है।
इंटरैक्टिव नॉलेज चेक (MCQ Quiz)
Q1. हाल ही में सरकार ने कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के तहत ऋण लक्ष्य को ₹1 लाख करोड़ से बढ़ाकर कितना कर दिया है?
A. ₹1.5 लाख करोड़
B. ₹2 लाख करोड़
C. ₹3 लाख करोड़
D. ₹5 लाख करोड़
Correct Answer: B. ₹2 लाख करोड़
Q2. एआईएफ योजना के तहत ₹2 करोड़ तक के ऋण पर कितने प्रतिशत का वार्षिक ब्याज अनुदान (Interest Subvention) दिया जाता है?
A. 2%
B. 3%
C. 4%
D. 5%
Correct Answer: B. 3%
Q3. नए नियमों के अनुसार, अब एक एकल इकाई (Single Entity) अलग-अलग स्थानों पर अधिकतम कितनी परियोजनाएं स्थापित कर सकती है?
A. 5
B. 10
C. 15
D. 25
Correct Answer: D. 25
Q4. ऋण चुकाने के लिए दी जाने वाली अधिस्थगन अवधि (Moratorium Period) अधिकतम कितनी हो सकती है?
A. 6 महीने
B. 1 वर्ष
C. 2 वर्ष
D. 3 वर्ष
Correct Answer: C. 2 वर्ष
Q5. किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को किस संस्था के माध्यम से क्रेडिट गारंटी कवर प्रदान किया जाता है?
A. SBI (भारतीय स्टेट बैंक)
B. CGTMSE (सीजीटीएमएसई)
C. NABSanrakshan (एनएबी संरक्षण)
D. RBI (भारतीय रिजर्व बैंक)
Correct Answer: C. NABSanrakshan (एनएबी संरक्षण)

